
परिचय-संस्कृति और साहित्य का प्रदेश मिथिला जो न जाने कितने रहस्य अपने आप में छुपाते हुये सदियों से बिहार की स्वर्णिम धरती पर विद्यमान है। कहते हैं किसी भी प्रदेश की पहचान उसके गाँवो और शहरों से होती है। और यहाँ बसी होती हैं हज़ारों साल पुरानी कहानियाँ और इन कहानियों में समाई होती हैं कई आम ज़िंदगियाँ जो समय के साथ खास और मुल्यवान हो जाती हैं और जिनकी गाथा युगों – युगों तक कही और सुनाई जाती है। मेरा बचपन भी इन्हीं किस्से कहानियों मेंं बीता है। मैं बहुत गर्व महसूस करती हूँ कि मैंने उस धरती पर जन्म लिया जहाँ माँ सीता कण-कण में हैं, जहाँ श्री राम प्रत्येक व्यक्ति के मन में हैं। मेरे बचपन की राजा – रानी की कहानियों में राजा श्री राम हैं और रानी माता सीता। आज मैं जिस नगर की बात कर रही हूँ वह साक्षी है त्याग, बलिदान, पराकर्म, प्रेम, धर्म, वचन और जीवन की।

जनकपुर नेपाल के हिस्से में पड़ने वाले मिथिला का भाग है। यह शहर नेपाल के धनुषा जिले में बसा है। मिथिला नगरी की सीमायें वर्तमान नेपाल के कुछ हिस्से तक फैली है।जनकपुर शहर आज धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन का केंद्र है। प्रत्येक वर्ष यहाँ देश – विदेश से हज़ारोें लोग भ्रमण के लिये आते हैं और अपने साथ यहाँ की पौराणिक कथाओं को ले जाते हैं। शहर के केंद्र में बसा जानकी मंदिर जनकपुर की गरिमा है। बाल्मिकी रामायण में वर्णित यह धार्मिक स्थल मिथिला का गौरव है। धर्म और आस्था में संल्गिन जनकपुर शहर और यहाँ के लोगों की छटा ही अलग है । आईये ले चलती हूँ मैं आपको ऐसी नगरी जहाँ कण-कण में कथा समाहित है सीता-राम की।
इतिहास- पौराणिक कथाओं के अनुसार जनकपुर राजा जनक के साम्राज्य की राजधानी थी। यहीं से राजा जनक पूरे मिथिला का कारभार संभालते थे। जनकपुर की खोज या स्थापना को लेकर अलग-अलग मान्यतायें हैें। जनकपुरधाम नाम से भी जाने जाना वाला शहर त्रेता युग के पन्नों में अंकित है। हिंदु मान्यताओं के अनुसार माता सीता को राजा जनक ने धरती माँ के कोख से प्राप्त किया और उन्हें अपनी पुत्री की तरह स्नेह और प्रेम से पाला पोशा। जनकपुर वही स्थान हैं जहाँ माँ सीता का बचपन और किशोरवस्था बीता। यहीं उनकी परवरिश हुई। पुरी दुनिया के लिये जो माँ हैं मिथिला के लिये वो युगों- युगों से बेटी है। जहाँ हर नर माता सीता का भाई और हर नारी बहन है। मान्यता है कि अयोध्या के राजकुमार प्रभु श्री राम का विवाह जनकपुर की राजकुमारी माता सीता से हुआ। और यह शहर साक्षी है त्रेता युग के उस ऐतिहासिक विवाह की। अद्वभुत है यह पावन धरा जहाँ आज भी श्री राम हर नगर वासी के दामाद हैं।
बाल्मिकी रामायण के अनुसार,जहाँ आज सीतामढ़ी (बिहार) है, त्रेताकाल में यहाँ तपोवन हुआ करता था। दस किलोमीटर के दायरे में ऋृषि- मुनियों के आश्रमों के अवशेष यहाँ आज भी मौजूद हैं। जो आज वर्तमान का जनकपुर है वह कभी त्रेता युग की मिथिला नगरी था। स्थानीये लोगों की मानें तो प्रभु श्री राम आज भा यहाँ मौजूद हैं।
बोलचाल की बात करें तो लोगों की बोली यहाँ मैथिली है। ज्यादातर लोग मैथिली बोलते हैं। लेकिन नेपाली को यहाँ की प्रथम भाषा का दर्जा दिया गया है। हिंदी, भोजपुरी, अवधी बोलने वालों की भी काफी संख्या है।
जनकपुर को तालाबों और पोखरों का भी शहर कहा जाता है। यहाँ काफी संख्या में तालाब देखने को मिलते हैं। उनमें से कुछ तालाबों का धार्मिक महत्व है। धनुष सागर,गंगा सागर, राम सागर, विहार कुंड इनमेंं मौजूद हैं। जनकपुर कई नदियों से घिरा नगर है। दुधमति, जलद, राती, बलान और कमला उनमें शामिल हैं।


दार्शनिक स्थल–
जानकी मंदिर- जानकी मंदिर जनकपुर का सबसे प्रसिद्ध धार्मिक स्थल है। जनकपुर के मध्य में बसा यह मंदिर नेपाल के सबसे बड़े मंदिरों में से एक है। अगर जनकपुर में कोई स्थान पर्यटकों को अपनी ओर सबसे अधिक खींचता है तो वह है जानकी मंदिर। जानकी मंदिर यहाँ आकर्षण का मुख्य केंद्र है। इतिहासकारों के अनुसार जानकी मंदिर 1898 में टीकमगढ़ की महरानी द्वारा बनवाया गया। जानकी मंदिर नौ लखा मंदिर के नाम से भी प्रसिद्ध है। चुंकि मंदिर के निर्माण में नौ लाख रुपये लगाये गये थेऔर यही कारण है इसके दूसरे नाम की । परंतु पौराणिक कथाओं के अनुसार जानकी मंदिर ही जनक महल है। इसी महल में राजा जनक ने अपना जीवन यापन किया, सीता माता के बचपन की अठखेलियाँ और किशोरावस्था का अल्लहड़पन आज भी इस महल में मौजूद है। जो विवाह त्रेता युग में हुआ जनकपुर की राजकुमारियां संग अयोध्या के राजकुमारों की वह विवाह वर्णन .आज भी मुर्तियों के रूप में जानकी मंदिर में शोभा बढ़ा रहा है।

स्थानीये मान्यता के अनुसार सीता जी के बारे में वर्णन मिलता है कि जब वह छोटी थी तबसे ही उनमें आध्यात्मिक शक्ति बहुत थी। उनके पिता राजा जनक के पास भगवान शिव का दिया हुआ एक धनुष था जिसे हिला पाना किसी के वश की बात नहीं थी लेकिन सीता माँ बचपन से ही उठा कर उसे रख दिया करती थीं। मिथिला के हर व्यक्ति के लिये वो आज भी यहाँ किशोरी रूप में विद्यमान हैं। जानकी मंदिर में राजा जनक और उनकी पत्नी महारानी सुनैना का भी मंदिर है। यहाँ लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न के भी मंदिर स्थित हैं। इतना ही नहीं यहाँ अयोध्या के राजा दशरथ का भी मंदिर बड़े गर्व से विद्यमान है।
जानकी मंदिर के प्रांगण से कुछ कदम दूर स्थित है विवाह मंडप जहाँ मुर्तियों के ज़रिये विवाह की पूरी कहानी बताई गई है। कहते हैं कि इस जगह आज भी मुहुर्त के बिना भी विवाह संभव हो जाती है।

जनकपुर के लोगों के क्या कहने । आज भी अयोध्या और जनकपुर के त्रेता युग के रिश्ते को उन्होनें कायम कर रखा है। आज भी हर बरस यहाँ त्रेता युग के विवाह की वो सारी रस्में निभाई जाती है जो कभी त्रेता में निभाई गई थीं। आज भी अयोध्या से जनकपुर बारात आती है।
इसे चमत्कार कहें या आश्चर्य लेकिन बाल्मीकी रामायण में जो भी वर्णित है वो हू-बहू उसी जगह पर है।
धनुषाधाम- जनकपुर से 30 किलोमीटर दूर स्थित है धनुषा धाम जहाँ आज भी शिवधनुष के अवशेष मौजूद हैं।ऐसी मान्यता है कि सीता-राम स्वयम्वर के दौरान जिस शिव धनुष को प्रभु श्री राम ने तीन हिस्सों में खंडित किया था उसका एक हिस्सा यहीं धनुषाधाम में आ गिरा जिसके साक्ष्य आज भी यहाँ हैं।
राम मंदिर- जानकी मंदिर के से कुछ कदम पर स्थित है राम मंदिर जहाँ नगर वासियों द्वारा भजनों का आयोजन किया जाता है और प्रेम और आस्था पूर्वक प्रभू श्री राम को याद किया जाता है।
इसके अलावे यहाँ पग-पग पे कई मंदिर स्थित हैं ।



जनकपुर नेपाल का सबसे तेजी से विकास करने वाला शहर है। यहाँ की आर्थिक व्यवस्था मुख्य रूप से पर्यटन, खेती और स्थानीये उद्योग पर निर्भर करती है। कलाकारों द्वारा निर्मित मिथिला पेंटिंग यहाँ पर आय का अच्छा स्त्रोत है।
त्योहारों की बात करें तो विवाह पंचमी, दीपावली और वीजयादशमी, छठ, मकर संक्रांति और राम-नवमी बहुत ही धूम-धाम से मनाई जाती है।
जनकपुर के लोग बहुत धार्मिक प्रवृति के हैं जिनका जीवन बहुत सादा है।

मिथिला का यह धार्मिक शहर अपने आप में किसी चमत्कार से कम नहीं है। तरह- तरह की नई तकनीक को अपनाता यह शहर आज भी अपनी सदियों पुरानी छवी लिये इतिहास रच रहा है।
jaane ka mann kar gaya, bahot sundar !
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swaagat
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badd sundar lekh likhayi chhi ahaan..mann prasann bhha gel..
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Bahoot bahoot dhanayabaad ahaan ke
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